सच्ची खुशी?

 सच्ची खुशी ?

Happiness



जीवन बड़ा सरल है हमने इसे इतना जटिल बना दिया है कि छोटी छोटी बातों पर हम दुखी एवं परेशान हो जाते हैं। इन्सान प्रकृति से ज्यादा समझदार कभी नहीं हो सकता। हमें इस बात को समझना होगा। यही कारण है कि हम मुस्कुराना भूलते जा रहे हैं। ज्यादा पाने के लालच में छोटी छोटी खुशियों को अनदेखा कर रहे हैं। अपना मूल स्वभाव भूलते जा रहे हैं। 

प्रकृति ने किसी के साथ भेदभाव नहीं किया। सबको 24 घंटे ही दिए हैं, समान रूप से हवा पानी दिया है। फिर समस्या कहां है?

हमें कुछ मौलिक चीजों का ध्यान रखना होगा:

हम सब चीजों का हिसाब रखते हैं सिवाय अपनी प्रसन्नता के। एक डायरी बनाएं जिसमें रोजाना का हिसाब लिखें कि आज हम कितने खुश रहें, कितने उत्साह पूर्ण रहें? क्या उत्साह केवल त्यौहारों तक ही सीमित है? क्या हम प्रतिदिन उत्साह पूर्ण नहीं रह सकते? रह सकते है बस हिसाब रखना होगा। 

नई नई चीजें सीखते रहिए, अपनी क्षमताओं को बढ़ाते रहिए, जीवन बहुत सुंदर है इस नजरिए से देखिए। प्रकृति का नियम है जो चीज़ हम दूसरों को देते हैं वहीं लौट के हमारे पास आती है। अगर हम खुश रहना चाहते है तो हमें खुशियां बांटनी होगी। खुश रहिए और खुशियां बांटें। 

आपके comments से हमें प्रेरणा मिलती है। अपने दोस्तों को शेयर जरुर करें और ब्लॉग को Follow भी करें। 

धन्यवाद 🙏










एक टिप्पणी भेजें

1 टिप्पणियाँ

कृपया कमेंट में कोई भी लिंक ना डाले