आनंदमयी जीवन (Happy Life)

आनंदमयी जीवन




आज आधुनिक युग में हम इतने व्यस्त हो गए हैं कि खुश रहना ही भूल गए। सुख दुःख, अमीर गरीब ये सब हमारे मन की अवस्थाएं हैं। हमारी खुशियों और परेशानियों के लिए हम खुद जिम्मेदार होते हैं। एक व्यक्ति हमें बहुत प्यारा लगता है वहीं कुछ लोग उसे नापसंद करते हैं। जो काम हमें पसंद नहीं होता, वहीं काम दूसरों को अच्छा लगता। ये सब हमारे मन की‌ अवस्थाएं हैं। हमें अपनी मन की‌ दशाओं को समझना होगा। 

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हमें अपने कर्म और वचनों से वैसा ही बनना होगा जो हमें चाहिए । अगर हम खुशियां चाहते हैं तो हमें दूसरों कि निंदा, बुराई और शिकायत से बचना होगा। सुबह उठते ही परमात्मा को धन्यवाद दे और सकारात्मक विचारों से अपने मन को भरिए, थोड़े दिनों में ही हम उर्जा से भर जाएंगे और खुश रहना हमारा स्वभाव बन जाएगा।

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भविष्य और भूतकाल में जीना कहा कि समझदारी है। ऐसा करके हम अपने वर्तमान को खतरें में डाल रहे हैं। हमारा आज भूतकाल में किए गए विचारों का ही परिणाम है। अगर हम भविष्य में खुश और आनंदित रहना चाहते हैं तो हमें अपने वर्तमान में अर्थात आज से, अभी से अच्छे विचारों को अपने व्यवहार में शामिल करना होगा।

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खुशियों को हम बाजार से नहीं खरीद सकतें, हमें खुद भी खुश रहना होगा और खुशियां बांटनी होगी। जो हम दूसरों को देंगे हमें वही वापस मिलेगा और ज्यादा मात्रा में मिलेगा। ये प्रकृति का नियम हैं।

जितनी खुशी हमें दूसरों कि मदद करने से मिलती है उतनी किसी दूसरे काम से नहीं मिलती, जितना हो सके दूसरों कि मदद करें ऐसा करने से हम स्वाभाविक रूप से खुश रह सकेंगे।

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