हमारा व्यक्तित्व (Our personality)

हमारा व्यक्तित्व (Our personality)




एक अच्छे और बेहतरीन व्यक्तित्व की कल्पना कौन नहीं करता। हर व्यक्ति की इच्छा होती है कि उसका व्यक्तित्व शानदार हो, सभी उसे पसंद करें। और इसके लिए हम बहुत कोशिश भी करते है, कई तरह के तरीके आजमाते हैं। लेकिन ज्यादातर मौकों पर कोशिशें नाकामयाब हो जाती है क्योंकि हम मौलिक गुणों को अनदेखा करके उपरी दिखावे पर ज्यादा ध्यान देते हैं। व्यक्तित्व का मतलब केवल बाहरी दिखावे से बिल्कुल नहीं है, इसका मतलब तो हमारे व्यवहारिक ज्ञान से है, हमारे सोचने के तरीके से है। ये जरूरी नहीं जो व्यक्ति दिखने में आकर्षक हो, स्वास्थ्य से भरपूर हो वो एक अच्छे व्यक्तित्व वाला इंसान भी होगा। हो सकता है उसे बात करने का तरीका तक मालूम ना हो। वास्तव में एक अच्छे व्यक्तित्व की पहचान उसके शब्दों में छिपी होती हैं। हमारे जीवन में शब्दों का महत्वपूर्ण योगदान है। हमारे शब्द ही है जो दूसरों को हमारे व्यक्तित्व के बारे में बताते हैं। हमारा व्यक्तित्व हमारे जीवन में बहुत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। 

सादगीपूर्ण जीवन 


यह सोचना ग़लत होगा कि चालाक बनने और अत्यधिक आत्मविश्वास से हमारे व्यक्तित्व में वृद्धि होगी। अपवाद को छोड़कर बाहरी दिखावा एक अच्छे व्यक्तित्व की पहचान हो ही नहीं सकता। एक सरल, सौहार्दपूर्ण आचरण और दूसरों के प्रति प्रेम पूर्वक व्यवहार ही एक अच्छे और सच्चे व्यक्तित्व की निशानी हैं। ज़रा सोचिए हम किसको पसंद करेंगे जो व्यक्ति सबके साथ अच्छा व्यवहार करता है, सादगीपूर्ण जीवन व्यतीत करता है और मुश्किल समय में सबकी सहायता करने को तैयार रहता है उसे या फिर उसे जो बहुत ज्यादा दिखावा करता है, केवल अपने बारे में ही सोचता है और कभी किसी के काम नहीं आता है।

अपनी खूबियों को पहचानें।


अपने आप को किसी से कम न समझे और अपनी इन खुबियों को पहचान कर इनको ओर बेहतर बनाने की आवश्यकता है। हम खुद अद्वितीय है, बहुत खुबियां है हमारे अंदर। ये काबिलियत ही हमारे व्यक्तित्व को विकसित करती हैं। दूसरों के जैसा दिखने के चक्कर में हम अपनी खुद की उपयोगिता को अनदेखा कर रहे हैं। किसी की नकल करना अच्छी बात नहीं है। अगर सफल और लोकप्रिय लोगों से कुछ सीखना ही है तो उनकी तरह सोचना सीखिए। वो लोग हमेशा समय की कद्र करते है, समय को बेकार के कामों में बर्बाद करना उन्हें पसंद नहीं होता। हमें भी समय का सदुपयोग करना होगा और मेहनत करके अपने व्यक्तित्व को निखारने में समय का निवेश करना होगा। धन के पीछे भागने से धन नहीं मिलता उल्टा दौलत के चक्कर में हम अपने समय का सदुपयोग नहीं कर पाते। अगर हम निरंतर अपनी काबिलियत को बेहतर बनाने पर काम करते रहेंगे तो एक दिन दौलत हमारे पीछे-पीछे दौड़ती हुई आएगी।


अपने आप पर भरोसा रखें 


व्यक्तित्व निर्माण में खुद पर भरोसा रखना बहुत जरूरी है। अपने आप को यकीन दिलाए कि हम हर परिस्थिति का सामना करने में सक्षम हैं। और मन में दोहराते रहे कि कोई भी काम मेरे लिए मुश्किल नहीं है। बार बार एक ही बात को दोहराने से हमारा अवचेतन मन उस बात को मानने लगता है, उसे स्वीकार कर लेता है और हमारा शरीर और भावनाएं उसका अनुसरण करने लग जाते है। परिणामस्वरूप विपरीत परिस्थितियों में भी हम सहजता से काम कर सकेंगे। हमें अपने आप को निरंतर सकारात्मक विचारों और प्रयासों से और बेहतर बनाना होगा, अपनी क्षमताओं को विकसित करना होगा। केवल तभी हम अपने व्यक्तित्व को निखार पाएंगें ।  

दूसरों को प्राथमिकता दें


एक अच्छा श्रोता एक सुंदर व्यक्तित्व की पहचान होती है। आज हर कोई बोलना चाहते है, अपने मन की बात रखना चाहता है इसके विपरित सुनना किसी को पसंद नहीं । एक अच्छा श्रोता बनना थोड़ा मुश्किल है लेकिन व्यक्तित्व विकास में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। जब कोई व्यक्ति हमसे बात करता है तो उसकी बातों को ध्यान से सुनना और उसकी भावनाओं का सम्मान करना होगा उस अवस्था में भी जब हम उससे असहमत हो। यही एक अच्छे श्रोता की पहचान होती है। जितना अच्छा श्रोता हम बन बनेंगे उतना ही लोग हमें पसन्द करेंगे। इससे हमारे आत्मविश्वास में स्वाभाविक रूप से बढ़ोतरी होगी और हमारे व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास हो सकेगा।

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धैर्य और दूसरों के प्रति सम्मान


हमारे पास भले ही ज्ञान का भंडार हो फिर भी बड़ों के प्रति सम्मान की भावना बनाएं रखने की आवश्यकता है। क्योंकि उनके पास अनुभव और समझदारी का खज़ाना होता हैं। उनसे कुछ सीखने का प्रयास करें। ये बातें हमारे व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं। वास्तव में धैर्य और दूसरों के प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता प्रकट करने से हमारे अंदर अच्छे व्यवहार का सृजन होता है। जिसके परिणामस्वरूप हमारे मन में सकारात्मक और अच्छे विचारों का जन्म होता है। धैर्य भी इन्हीं अच्छे गुणों में से एक है। धैर्य के कारण ही हम विपरीत परिस्थितियों को आसानी से काबू कर पाते हैं।

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सक्रियता से रहें


आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में सक्रिय रहना अत्यन्त आवश्यक हैं। पिछली पीढ़ी की बात करें तो वो लोग बहुत कम बीमार होते थे और लम्बा जीवन जीते थे। क्योंकि वो लोग आज की तुलना में अधिक सक्रिय रहते थे, शारीरिक मेहनत करते थे। और उनका समाज में योगदान भी बेहतर था। विज्ञान ने उन्नति तो बहुत की लेकिन हमारी सक्रियता को कम कर दिया। पहले जिस काम को करने में समय और मेहनत लगती थी अब वह काम कुछ ही मिनटों में हो रहा है और हमें मेहनत भी नहीं करनी पड़ती। इससे हमारी सक्रियता में कमी आई है, हम ज्यादा आलसी हो गए हैं। यही कारण है कि हमारा शरीर कमजोर और बिमारियां मजबूत हो गई। सक्रियता को बढ़ाना होगा, शारीरिक मेहनत करनी पड़ेगी, तभी हम अपने आप को स्वस्थ रख सकेंगे। और एक अच्छे व्यक्तित्व का निर्माण कर पाएंगे।

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