असंभव कुछ भी नहीं (there is nothing impossible)

असंभव कुछ भी नहीं (there is nothing impossible)



दिन रात के अथक प्रयासों, विपरित परिस्थितियों में लगातार संघर्ष के साथ साथ दुनियां के तानों को सहन  करने के बाद सफलता हासिल होती हैं। कामयाब होने के बाद कामयाबी को बरकरार रखने का सवाल उठता है। बहुत कम लोग है जो सफल होने के बाद भी लगातार प्रयास करते रहते हैं। और अपने आप को शिखर पर बनाए रखते हैं। हम यहां चूक जाते है थोड़ी सी सफलता मिलते ही हममें अहंकार आना शुरू हो जाता है और प्रयास करना छोड़ देते है। हम इस सफलता को अपनी व्यक्तिगत सफलता मान लेते हैं, हम सोचते है कि हमारी कामयाबी के लिए पूरी तरह से हम खुद (स्वयं) जिम्मेदार है लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। जब एक इमारत बनाई जाती है तो उसके निर्माण में सैकड़ों लोगों का सहयोग होता है। उसी तरह हमारी सफलता के पीछे भी बहुत से लोग (हमारे हितेषी, परिवार जन) और अनुकूल परिस्थितियां होती हैं। और हम उन सबका आभारी होने की अपेक्षा अहंकार वश अपना ही बखान करते रहते हैं। यही से हमारा डिग्रेडेशन (पतन) शुरू हो जाता हैं। जिस प्रकार पहाड़ पर चढ़ते हुए हम आगे झुक कर चलते हैं तभी शिखर तक पहुंचते हैं उसी तरह हमें जीवन में सफलता प्राप्ति से पहले और बाद में हमेशा विनम्रता और कृतज्ञता को अपनाना ही होगा। केवल तभी हम अपनी सफलताओं को बरकरार रख पाएंगे। और समाज एवं मानवता के लिए कुछ अच्छा कर पाएंगे। अगर कोशिश की जाए तो
असंभव कुछ भी नहीं है।

Politeness


विनम्रता हमारी उन्नति में सहायक होती है। विनम्र व्यक्ति को सब पसंद करते है। कठोर और रूढ़ व्यक्ति को कोई पसंद नहीं करता। विनम्रता प्रकृति द्वारा प्रदत्त उपहारों में से एक है। भगवान श्री राम के विनम्र स्वभाव को कौन नहीं जानता। उन्होंने विनम्रता के बल पर ही सबका विश्वास जीता और सबके प्रिय बनें। हमें भी भगवान श्री राम से विनम्रता और कृतज्ञता का पाठ सीखना होगा। केवल तभी हम अपनी सफलताओं को बरकरार रख पाएंगे और भावी पीढ़ी के लिए कुछ बेहतर कर पाएंगे। हमें गंभीरता से इन बातों पर विचार करना होगा क्योंकि विचार ही हमारे भविष्य का निर्माण करते है, आज हम जो कुछ भी है वो हमारे कल (बीते हुए कल) का परिणाम है। अगर हमें अपने भविष्य को सुखद और सुंदर  बनाना है तो आज से ही अभी से सुंदर विचारों को अपने व्यवहार में शामिल करना होगा। यह सफलता प्राप्ति के सबसे महत्वपूर्ण रहस्यों में से एक हैं।  एक बार तो कोशिश करनी ही होगी क्योंकि असंभव कुछ भी नहीं है।

Man is the effigy of mistakes


इन्सान गलतियों का पुतला है फिर भी हमें दूसरों कि गलतियों को नजरंदाज करना होगा अगर दूसरों की गलतियों को पकड़ कर बैठ गए तो खुद का सुधार नहीं कर पाएंगे। और हमारे जीवन का स्तर कम होता चला जाएगा। हमें हमेशा धैर्य के साथ अपने आप को बेहतर बनाते जाना है। इस दुनियां में असंभव कुछ भी नहीं है। बचपन में हमारे माता पिता कहते थे कि हमारा बेटा शेर है, बहुत बहादुर है, बहुत समझदार है। अभी सही समय है हमें अपने आप को समझदार और बहादुर साबित करना है। कूद पड़िए मैदान में हम किसी से कम नहीं है हमारे अंदर भी वो सब गुण मौजूद है जो कामयाब होने के लिए जरूरी होते हैं। हमें हमेशा जीत के बारे में  सोचना है। अगर कुछ अलग करना है तो यही तरीका अपनाना होगा और कोई रास्ता नहीं है ना ही कोई हमें आगे बढ़ने के बारे में बतायेगा। हमें खुद ही अपना रास्ता चुनना होगा। कोई दूसरा भी तभी हमारी मदद करेगा जब हम खुद अपनी मदद करेंगे। अगर प्रयास किया जाए तो दुनियां में सब कुछ संभव है


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