स्वस्थ सोच ( Healthy Thinking)

स्वस्थ सोच (Healthy Thinking  )

खुशियां हमारे अंदर ही मौजूद हैं






सोच सोच कर घबराएं नहीं, हमारे अंदर ही सारी खुशियां मौजूद हैं। हर व्यक्ति खुशियों की तलाश में रहता है। स्वस्थ सोच का सीधा संबंध खुशियों से होता हैं। सकारात्मक सोच हमारे लिए एक बेशकीमती सम्पत्ति के समान है। हमने खुशी को चीजों से जोड़ दिया है। जब हमारे पास बड़ी गाड़ी होगी तो हम खुश होंगे, जब हमारे पास बहुत पैसा आएगा तो हम खुश होंगे, जब बड़ा घर होगा तो उत्साहपूर्ण रह पाएंगे। खुशियों का धन दौलत से कोई लेना-देना नहीं होता। खुशियां तो स्वाभाविक रूप से आती हैं और हमारे अंदर ही मौजूद होती हैं। दूसरों से सहायता की उम्मीद रखते है कि कोई आएगा और हमारी मदद करेगा। इतना सब कुछ हमारे पास होते हुए भी एक लाचार जीवन जीना सर्वथा अनुचित हैं।


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ईश्वर ने हमें सम्पूर्ण बनाया है

ईश्वर ने हम सबको सम्पूर्ण बना कर भेजा है। सभी बिमारियों का इलाज हमारे अंदर मौजूद है, प्रत्येक गुण हमारे अंदर समाहित है। जिस खुशी के लिए हर कोई दर दर भटकता है वो भी हमारे अंदर ही मौजूद हैं। ये सब हमारी सोच पर निर्भर करता है कि हम हमारे आस-पास की चीजों को किस नजरिए से देखते हैं। आपने महसूस किया होगा जब हम किसी जरूरतमंद व्यक्ति की मदद करते है, किसी का दिल से शुक्रिया करते है, ईश्वर के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते है तो हमें एक सुखद अनुभव होता हैं। वास्तव में यह खुशी का ही एक रूप है। दूसरों को दोष देना तो दुनिया के सबसे आसान कार्यों में से एक है। कोई भी इसे बड़ी दक्षता के साथ कर सकता हैं। हम सब उस सर्व शक्तिमान ईश्वर की संतान है ऐसा छोटा काम हमें शोभा नहीं देता। चलिए कुछ अलग करते है खुद की कमियों को पहचान कर उन्हें सुधारने की एक छोटी सी कोशिश करते हैं। अपनी सोच को स्वस्थ करने की कोशिश करते हैं। ऐसा करके हम न केवल अपने आपको मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत बना पाएंगे बल्कि अपने आस पास पर भी माहौल में अच्छा प्रभाव डाल सकेंगे।


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हममें से ही कुछ लोग ऐसे भी है, जो हर समय सुंदर वस्तुओं की बातें करते है, अच्छे व्यक्तित्व की बात करते है, अच्छी स्मृतियों को बार बार याद करते हुए खुद को प्रसन्न रखते हैं। कितनी भी कठिन परिस्थितियां हो ये लोग कभी भी किसी को दोष नहीं देते, कितना भी बड़ा आर्थिक संकट आए, दुःख, दर्द आए कभी किसी को अहसास नहीं होने देते कि उनको कोई समस्या है। ऐसे लोग जीवन की कठिन से कठिन परिस्थितियों को बड़ी सरलता से पार कर जाते हैं और हमेशा खुश रहते हैं। इसके अलावा ऐसे लोग जरूरतमंद व्यक्ति की मदद करने से भी पीछे नहीं हटते। हमेशा खुश रहने वाले ये व्यक्ति सबको अपनी ओर आकर्षित कर लेते हैं, ऐसे व्यक्तियों को सब पसंद भी करते हैं। ऐसा स्वस्थ सोच, स्वस्थ विचारों के कारण ही संभव है। स्वस्थ सोच से हम स्वयं भी अपने जीवन में प्रसन्नता रूपी उपहार का उपयोग कर सकते है और दूसरों को भी इसका लाभ दे सकते हैं। और प्रसन्नता रूपी खजाने को दूसरों को वहीं बांट सकते है जिनका मन निरंतर प्रसन्नता के विचारों से सराबोर रहते हो। 

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स्वस्थ सोच का प्रभाव

सही सोच से हम न केवल मानसिक रूप से मजबूत होंगे बल्कि हमारे शारीरीक स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता हैं। हमारा शरीर उसी तरह प्रतिक्रिया करेगा जैसा हम विचार करेंगे। हम लोग इस बात से अनभिज्ञ है कि हमारे विचार ही हमारे व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं। अच्छे विचार अच्छा व्यक्तित्व, बुरे विचार बुरा व्यक्तित्व। वास्तव में नकारात्मक विचार और भावनाएं हम पर इस कदर हावी हो गई है कि हम अच्छे विचारों के विषय सोच तक नहीं पाते। और अगर कोई हमें समझाने की कोशिश करें तो उसे फालतू की बातें समझकर अनदेखा कर देते हैं। इसलिए हमें बड़े ही सावधानीपूर्वक विचारों का चयन करना होगा। जिस प्रकार हम अपने घर की सफाई करते है ठीक उसी प्रकार हमें निरंतर अपने नकारात्मक विचारों को सकारात्मक विचारों से बदलने की आवश्यकता है। जिस प्रकार काई हटाने पर झील का स्वच्छ जल नज़र आता है उसी प्रकार मन से व्यर्थ विचारों को हटा देने से ही सकारात्मक और उर्जा वान विचारों का उदय होता हैं।  व्यर्थ जानकारियों से खुद को बचाकर उपयोगी जानकारियों को ही ग्रहण करने की आदत विकसित करनी होगी। केवल तभी हम अपने दिमाग़ का बेहतर इस्तेमाल कर पाएंगे। स्वस्थ सोच वाला इंसान कभी निराश, हताश नहीं होता। सफल व्यक्ति सकारात्मक विचारों के बलबूते ही शिखर तक पहुंचने में कामयाब होते हैं। हम सब भी इस विकल्प का का चयन अपनी महत्वकांक्षाओं को पूरा करने में कर सकते हैं।

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स्वस्थ सोच विकसित करने की आवश्यकता


ज्यादा पाने कि लालसा में हमने अपने आप से बहुत समझौते किए हैं। अपनी सेहत से खिलवाड़ किया, अपने रिश्तों को अनदेखा किया, जरूरत के समय दोस्तों से मुंह फेर लेना ऐसी बहुत सारी बातों को अनदेखा किया है। ये स्वस्थ सोच के ठीक विपरीत है। ये ठीक है कि कामयाब होने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है, बहुत त्याग करना पड़ता है। लेकिन इन महत्वपूर्ण चीजों को अनदेखा करके अगर हम अमीर या सफल इंसान बन भी गए तो सब अर्थहीन होगा। अपनी क्षमताओं को दांव पर लगाकर अगर सफलता प्राप्त कर भी ली तो कोई लाभ नहीं होगा। इन सब चीजों को साथ लेकर चलने की आवश्यकता है तभी हम एक स्वस्थ सोच विकसित कर पाएंगे। और एक स्वस्थ और सुंदर समाज का निर्माण कर सकेंगे।


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