जिम्मेदारी (Responsibility)

जिम्मेदारी  (Responsibility)


निरंतर प्रयास द्वारा जिम्मेदारी निभाना





हमारी सकारात्मकता और नकारात्मकता हमारे कार्यों और हमारे आस-पास के माहौल को प्रभावित करती हैं। परीक्षा देने के बाद अगर हम इसी संशय में रहते है कि पता नहीं पास हो पाऊंगा या नहीं, कितने नम्बर आएंगे, पता नहीं क्या होगा। इससे परीक्षा में पास होने की संभावना थोड़ी कम हो जाती हैं। क्योंकी पाज़िटिव एटिट्यूड तो रखना ही होगा इसके अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है हमारे पास। इसकी अपेक्षा परिणाम का इंतजार न करके फिर से प्रयासरत होना ज्यादा बेहतर साबित होगा। जिस प्रकार सफलता प्राप्ति पर बड़े उत्साह और जोश के साथ हम पूरी जिम्मेदारी लेते है ठीक उसी तरह असफल होने पर भी जिम्मेदारी हमें ही लेनी होगी। हम अपने जीवन में जो कुछ भी हासिल करना चाहते है, जो कुछ भी हमारी महत्वकांक्षाएं है उसके लिए केवल और केवल हमारी खुद की ही जिम्मेदारी होगी। वास्तव में सफलता और असफलता हमारे विचारों और भावनाओं का ही परिणाम होती हैं। निरंतर प्रयास और सकारात्मक विचारों के साथ सही दिशा का चयन ही हमें सफलता के शिखर तक पहुंचने में हमारी सहायता करता है। ये सब तब संभव होगा जब हम अपनी जिम्मेदारी को बिना किसी शिकायत और बहाने के निभाएंगे।


इसे भी 👉 पढ़ें :- हमारा व्यक्तित्व
                       हमेशा खुश कैसे रहें 

प्रकृति संरक्षण द्वारा जिम्मेदारी निभाना

 



इंसानों और प्रकृति के बीच बहुत ही गहन संबंध है। प्रकृति से हमें बहुत कुछ सीखने को मिला है। प्रकृति तो हमारी मां के समान है जिस प्रकार एक मां अपने बच्चों की देखभाल करती है, उनकी हर जरूरतों का ख्याल रखती है, दुलार करती है। उसी तरह प्रकृति मां हम सब को पेड़-पौधों के जरिए शुद्ध हवा देती है, पहाड़ों से ताजा पानी देती है, खाने के लिए खाना, सब्जियां, फल आदि प्रदान करती हैं। और सबसे महत्वपूर्ण बात बदलें में वापस कुछ भी नहीं लेती। ठीक एक मां की भांति हमारा पालन-पोषण करती हैं। कभी शिकायत नहीं करती। हमेशा से हमारा भरण पोषण करती आ रही हैं। हमें भी एक बेटे की तरह अपनी जिम्मेदारी का पालन करते हुए अपनी प्रकृति मां की देखभाल करने की आवश्यकता है। प्रकृति को हरा भरा रखने, साफ सुथरा रखने की जिम्मेदारी हमें उठानी ही होगी।

इसे भी 👉 पढ़ें:-

आनंदमय जीवन

सच्ची खुशी

सरल जीवन

सफल आदतें

हमेशा खुश कैसे रहें

डायमंड्स


गलतियों को स्वीकार करके जिम्मेदारी निभाना

गलती होने पर अपनी गलतियों को नजरंदाज करना उस समय तो हमें क्षणिक सुख देता है लेकिन ये क्षणिक सुख भविष्य में हमारे लिए बहुत सारी समस्याएं उत्पन्न कर सकता हैं। और साथ ही हमारी क्षमताओं को बेहतर बनाने के लिए मिला मौका भी हम गवां ‌देते हैं। गलतियां होना स्वाभाविक है क्योंकि जब हम काम करते है तो गलतियां भी होंगी। अपनी गलतियों को स्वीकार करना श्रेष्ठ गुणों में से एक है। स्वीकार करके हम अपने लिए एक नए अवसर का निर्माण करते हैं। जिम्मेदारी लेनी ही होगी क्योंकि हमारे लिए यह एक बेहतर विकल्प है। किसी काम को करने की जिम्मेदारी लेना उस कार्य में सफलता की ओर पहला पड़ाव होती हैं। और सबसे महत्वपूर्ण बात समय रहते समय का सदुपयोग करके हम अपने आप को बेहतर बनाने का काम कर सकते हैं। व्यर्थ की बातों में समय गंवाना बिल्कुल भी समझदारी नहीं है। क्योंकी गुज़रा वक्त दोबारा नहीं मिलता। कहावत भी है कि कोई कितना भी अमीर हो गुज़रा वक्त नहीं खरीद सकता।


इसे भी 👉 पढ़ें :- सामर्थ्य


निस्वार्थ भाव से मदद से जिम्मेदारी निभाना

ज्यादातर मामलों में सफलता प्राप्ति के बाद अहंकार की भावना जागृत हो जाती है। जबकि ज्यादा पाने के बाद तो परिवार, समाज और प्रकृति के प्रति ज़िम्मेदारी बढ़ जाती है। खाना, पीना और सोना और फिर एक दिन भाग्य को दोष देते हुए एक नम्बर की तरह इस दुनियां से चलें जाना। ये तरीका सर्वथा अनुचित हैं। हम इस ग्रह के सर्वश्रेष्ठ जीव हैं, हमें जिम्मेदारी लेनी ही होगी। प्रकृति ने अपने सब भंडार हमारे लिए खोल रखें बस उनका उपयोग करके अपने आप को और अपने समाज को ताकतवर बनाना है। क्या हम अपने जीवन काल में मात्र दो पेड़ नहीं लगा सकते, क्या हम किसी जरूरतमंद बच्चे की शिक्षा का भार नहीं उठा सकते, क्या हम खुद के अलावा थोड़ा समय दूसरों की भलाई में नहीं दे सकते, क्या हम अपने बिगड़ते पर्यावरण के संरक्षण के लिए कुछ नहीं कर सकते है। बहुत कुछ कर सकते है । हम ये काम कर सकते बस इस विषय में थोड़ा चिंतन मनन करने की आवश्यकता है। ये सब काम छोटे-छोटे है लेकिन हम सब के लिए  बहुत महत्वपूर्ण है। दुनियां में लोग हमें हमारे कार्यों से ही पहचानेंगे इसके अलावा हम कितनी भी बातें करते रहे कोई पूछने वाला नहीं। संसार ने आज तक आगे बढ कर रास्ता दिखाने वालों का ही सम्मान किया है। पीछे चलने वाले या व्यर्थ समय बर्बाद करने वालों को कोई पसंद नहीं करता। ज्यादा ऊंचाई पर जाने के बाद ‌शांत और जिम्मेदारी पूर्ण होना ही होता है। 

इसे भी 👉 पढ़ें :- प्रार्थना की शक्ति


स्वस्थ के प्रति जागरूक होकर जिम्मेदारी निभाना


कितनी बड़ी विडम्बना है एक बीमारी हमें हमारी वास्तविकता से अवगत करवाती हैं कि हम कितने कितने कमजोर हो गए है, चीजों और कामों को टालना हमारी आदतों में सुमार हैं, आलस्य का त्याग करके हमें प्रत्येक कार्य को नियमित और समय पर करना होगा। हमें अच्छी अच्छी बातें पढ़ कर, समझकर उन्हें अपने व्यवहार में शामिल करने की आवश्यकता है। स्वास्थ्य के नियमों का पालन करके हम अपने आप को और अपने परिवार को स्वस्थ रखने में मदद कर सकते हैं। स्वस्थ व्यक्ति ही जीवन के हर क्षेत्र में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। स्वास्थ्य संबंधी आदतों में सुधार करके भी हम एक तरह से अपनी जिम्मेदारी निभाने हैं। क्योंकी जब हम स्वस्थ होंगे तभी अपने परिवार और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को सफलतापूर्वक निभा सकेंगे।


इसे भी 👉 पढ़ें:- समय ही धन है


आपके comments से हमें प्रेरणा मिलती है। अपने दोस्तों को शेयर जरुर करें और ब्लॉग को Follow भी करें। 
धन्यवाद 🙏



एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ