हमें कृतज्ञ होना चाहिए (we need to be gratitude)

हमें कृतज्ञ होना चाहिए (we need to be gratitude)


हमें कृतज्ञ होना चाहिए । कृतज्ञता ही एकमात्र कौशल है जिसकी हमें वास्तव में आवश्यकता है। सारे पक्षी ईश्वर की स्तुति में गीत गाते हैं, झरने कलकल करते हुए प्रकृति की तारीफ करते है, प्रत्येक जीव अपने तरीके से भगवान के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करता है। जीवन की प्रत्येक अच्छी वस्तु और आस पास होने वाली अच्छी घटनाओं और चीजों के लिए भगवान को आभार व्यक्त किया जाना चाहिए। हमें परमात्मा को प्रत्येक वस्तु के लिए धन्यवाद देना होगा जो उन्होंने हमें मुफ्त में प्रदान किए है। हमारे अंदर ये बहुमूल्य गुण विद्यमान है। लेकिन लम्बे जीवन और धन सम्पदा पाने की लालसा में हम अपने अंदर मौजूद इस गुण का उपयोग करना भूलते जा रहे हैं। हमें कृतज्ञ होना चाहिए। जीवन में बढ़ते तनाव का कारण भी हमारी यही लालसा है। अपने जीवन में बेहतर परिणाम पाने के लिए हमें आभार व्यक्त करने के इस बेहतरीन गुण के उपयोग करने की आवश्यकता है। कभी कभी हम अपने जीवन में एक लम्बी उदासी और अकेलेपन को झेलते हैं। और इसका असर हमारे कार्यों पर पड़ता हैं। इसका मुख्य कारण दूसरों से हमारी बढ़ती उम्मीद है। आमतौर पर जब हम किसी व्यक्ति का कोई काम करते है तो बदले में ये उम्मीद रखते हैं कि वो भी समय पर हमारे काम आएं। और जब वह व्यक्ति हमारी उम्मीदों को पूरा नहीं करता तो हम परेशान हो जाते हैं, और ‌निराश होकर अपने आप को कोसना शुरू कर देते हैं। कृतज्ञता इससे उबरने का सबसे महत्वपूर्ण तरीकों में से एक है। बिना गुणों और संस्कारों के हमें अपने आप को और भावी पीढ़ी को कुछ बेहतर सीखाने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता हैं। हमें कृतज्ञ होना चाहिए ।

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हमें कृतज्ञ होना चाहिए। सबसे पहले तो हमें जो कुछ भी मिला है चाहे वो कम हो या ज्यादा उसके लिए ईश्वर को धन्यवाद देना होगा। जिस तरह हम चीजों के न होने पर शिकायत करना कभी नहीं भूलते ठीक उसी प्रकार जो कुछ हमारे पास है हमें उसके लिए धन्यवाद देना भी नहीं भूलना चाहिए। हमें अपने सुन्दर सुखद जीवन के लिए ईश्वर के प्रति कृतज्ञ होना होगा, फिर हमें भोजन, हवा और पानी के प्रति भी धन्यवाद व्यक्त करना होगा। ये सब बातें हमें साधारण जरूर लगेगी लेकिन हम सब की बेहतरी के लिए यह अनिवार्य है। जितना हम प्रकृति के पास और साथ रहेंगे उतना ही हम शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनेंगे। थैंक्स गिविंग दृष्टिकोण हमें सकारात्मक उर्जा प्रदान करता हैं। जिस प्रकार पेट्रोल की गाड़ी में डीजल भर देने से गाड़ी अपनी पूरी क्षमता से नहीं चल पाएगी और शीघ्र ही ख़राब भी हो जाएगी। ठीक उसी प्रकार धन्यवाद देना, किसी के प्रति कृतज्ञता प्रकट करना हमारे उर्जा स्तर को बढ़ाने में हमारी सहायता करता है। जीवन में उन्नति के लिए हमें कृतज्ञता को अपनाना ही होगा। हमारे पास इसके अलावा कोई और विकल्प नहीं है। सफल व्यक्तियों में ये गुण अवश्य ही पाया जाता हैं। इस महत्वपूर्ण गुण को अपनाने से हमें अपने जीवन में छिपी संभावनाओं को तलाशने में मदद मिलती हैं। हमें कृतज्ञ होना चाहिए।

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हमें कृतज्ञ होना चाहिए। कृतज्ञता जीवन के विशेष गुणों में से एक है। चाहे हम कितना भी सफल हो जाएं, कितनी भी धन दौलत कमा ले अगर हमारे अंदर कृतज्ञता के भाव मौजूद नहीं है तो संतुष्टि कभी नहीं मिल पाएगी। ये दोनों एक दूसरे के पूरक है। कृतज्ञता का भाव हमें पेड़-पौधों और वृक्षों से सीखने को मिलता हैं। पेड़ पौधे, वृक्ष हमेशा हमें फल, फूल, आक्सीजन और छाया देते हैं और इसके बदले हमसे कुछ नहीं मांगते और न कभी शिकायत करते हैं। क्या ये एक शानदार चीजों में से एक नहीं है। दूसरों के लिए जीना, सहयोग करना सच्चे गुणों में से एक है। हमें अपने व्यवहार में ऐसे विचारों और भावनाओं को शामिल करने की आवश्यकता है। इन विचारों से ही हम अपना सर्वांगीण विकास कर सकते हैं। हमें दूसरों को सम्मान देने की आदतों को विकसित करना होगा। दूसरों की छोटी छोटी मदद, अच्छी भावनाएं जो उन्होंने हमारे प्रति दर्शाई, हमारी मदद की थी हमेशा याद रखें और अपनी उन सब बातों को भूला दीजिए जब हमने उनकी सहायता की। यही कृतज्ञता है। कृतज्ञता एक श्रेष्ठ गुण हैं। हमें कृतज्ञ होना चाहिए। दूसरों की कमी और बुरे व्यवहार को याद करके हम अपने आप का ही नुकसान करते हैं। हमें बुरी बातों को भूलकर अच्छी बातों पर ध्यान देने की आवश्यकता है। इससे हमें खुद अपने आप को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। क्योंकी जब हम बदले की भावना से या गुस्से में किसी को ग़लत कहते है तो उसका सबसे ज्यादा असर हमारे उपर ही पड़ेगा। हमें कृतज्ञ होना चाहिए।

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हमें कृतज्ञ होना चाहिए। दिमाग़ शरीर का एक महत्वपूर्ण भाग है। इससे हम अपनी सारी गतिविधियों को करते हैं। हमें अपने इस हिस्से का उपयोग अपने विकास के लिए करना चाहिए। हमारा दिमाग लाभकारी कार्यों में ही ज्यादा सक्रिय रहता है। हमें अपने आप को रोजाना छोटे छोटे निर्देश देने होंगे। ताकि इन महत्वपूर्ण बातों को दिमाग तक पहुंचाया जा सके। छोटे प्रयासों से ही ये कार्य संभव है। हमारा दिमाग ज्यादातर भावनाओं और डर के कारण प्रभावित होता हैं। तो हमें अपने विचारों में कृतज्ञता को शामिल करने की आवश्यकता है। विचारों से भावनाओं तक और फिर हमारे अवचेतन मन तक। जब बात हमारे अवचेतन मन में पहुंच जाती है तो हमारा दिमाग उसे ग्रहण कर लेता है और ये महत्वपूर्ण गुण हमारे स्वभाव का हिस्सा बन जाता हैं। हमें कृतज्ञ होना चाहिए। इसके साथ ही हमें अपने अंदर छिपे हार जाने के डर को दूर करने की आवश्यकता है। हमें कृतज्ञ होना चाहिए।

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