श्रेय देना सीखना होगा (Learn to give credit )

 श्रेय देना सीखना होगा 

(Learn to give credit )



हर इंसान के दिल की गहराइयों में ये लालसा छिपी होती है

श्रेय देना सीखना होगा । तारिफ करना किसे अच्छा नहीं लगता। हर इंसान के दिल की गहराइयों में ये लालसा छिपी होती है कि उसे सराहा जाएं। पूरी दुनियां में लोग इस चीज को हमेशा महत्व देते है कि लोग उनके काम का सम्मान करें और समय पर उनका साथ दें। इसके लिए सबसे पहले हमें खुद को व्यवहारिक तौर पर समृद्ध बनाना होगा। और हमारी सफलता, उन्नति के लिए अपने माता-पिता, सगे संबंधियों और दोस्तों को श्रेय देना सीखना होगा। आमतौर पर हम जब भी कोई अच्छा काम करते है या फिर सफलता की ऊंचाइयों को हासिल कर लेते है तो उसके लिए हम ईश्वर, अपने माता-पिता, भाईयों और दोस्तों का कभी भी धन्यवाद नहीं देते, उनको अपनी सफलता के लिए जिम्मेदार नहीं मानते। जबकि एक सफल व्यक्ति को शिखर तक पहुंचाने में बहुत लोगों का हाथ होता हैं। हमें उनके प्रति कृतज्ञ होना चाहिए और अपनी सफलता का पूरा श्रेय उन्हें देना सीखना चाहिए। इससे अहंकार का पतन होता हैं। और अहंकार रहित इंसान सफलता के साथ साथ शीघ्र ही ख्याति भी प्राप्त कर लेता है। इस प्रकार के विचारों से हम अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकते हैं। हमें खुद से वादा करना चाहिए कि कोई भी चीज हमारे सीखने की इस प्रक्रिया में बाधा न बने। ऐसा कोई भी दिन न हो जिस दिन हम कुछ नया न सीखें। श्रेय देना सीखना होगा ।

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अप्रत्यक्ष मदद से ही हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती हैं।


श्रेय देना सीखना होगा । विचारों से ही व्यक्ति महान बनता है। पाज़िटिव शक्ति से हमारे विचार मजबूत बनाते हैं। हर इंसान में कोई न कोई खूबी जरूर होती है। और उनकी अप्रत्यक्ष मदद से ही हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती हैं। क्या हम स्वामी विवेकानंद, दशरथ मांझी, सचिन, जैसा लोकप्रिय नहीं बनना चाहते? हां, हम सब बनना चाहते हैं, बहुत आगे बढ़ना चाहते है, कुछ अच्छा करना चाहते है, अपने लिए, समाज के लिए, इंसानियत के लिए। और इन सबके लिए हमें विश्व के महानतम लोगों से प्रेरणा मिलती हैं। हम भी उनके जैसा बनना चाहते हैं। इंसान की बुनियादी जरूरतों में से एक है कि वह लोकप्रिय बनें। कई बार हमें उन सबसे भी हिम्मत और प्रेरणा मिलती है जिनको हम सामान्य व्यक्ति समझ कर अनदेखा कर देते हैं। इसलिए सबसे बेहतरीन तरीकों में से एक है श्रेय देना। जब आप अपने अच्छे कार्यों का श्रेय अपने माता-पिता, भाईयों और दोस्तों को देते है तो उन लोगों की अच्छी भावनाएं हमारे साथ जुड़ जाती है और हम सफलता के साथ साथ मानसिक शांति भी हासिल कर सकते हैं। हमें अपने मन मस्तिष्क में इस बात को बैठाना चाहिए कि जितना हम दूसरों को देते है वो सब हमारे पास बढ़कर ही आता है चाहे वो ज्ञान हो या धन हो, फिर श्रेय देना। इस तरह अपने व्यवहार में परिवर्तन करने से हमें महत्वपूर्ण बनने से कोई नहीं रोक सकता। श्रेय देना सीखना होगा ।

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हम सब बुनियादी रूप से बहुत मजबूत है


श्रेय देना सीखना होगा लेने के बजाय। हमारे साथ दिक्कत ये है कि छोटी सी कोई समस्या आई नहीं और हम हथियार डाल देते हैं। नकारात्मक भावनाएं तुंरत हमारे उपर हावी होने लगती हैं। इसके विपरित हम सब बुनियादी रूप से बहुत मजबूत है बस जरूरत है उस गुण को विकसित करने की। ज्यादातर मामलों में हम खुद को कम आंकते हैं और अनुमान लगाते रहते है कि ऐसा हो जाएगा, वैसा हो जाएगा। जबकि वास्तव में परिणाम कुछ और ही होता हैं। हमें अपने आप को सकारात्मक विचारों और भावनाओं से इतना शक्तिशाली बनाना होगा कि कितनी भी विपरीत परिस्थितियां आ जाएं कोई भी बुरी भावना या बुरे विचार हमारे मन में न आए। हमें अपने विचारों और भावनाओं से व्यवहारिक बनने की आवश्यकता है। हमें अपनी सफलताओं और अच्छे कार्यों का श्रेय अपने माता-पिता, भाईयों और दोस्तों को देना चाहिए क्योंकि ऐसा करके हम सफलता के साथ साथ एक सरल जीवन भी जी सकते हैं। सफलता प्राप्ति के हमारी यही कोशिश होनी चाहिए कि जैसा व्यवहार हम पहले करते थे ठीक वैसा ही सफल होने के बाद भी करें। व्यवहार में परिवर्तन हमें पीछे धकेलने का काम करता है। श्रेय देना सीखना होगा ।

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सब के प्रति सम्मान की भावना रखनी चाहिए


श्रेय देना सीखना होगा । हमें अपनी जिम्मेदारी को सफलतापूर्वक निभाने की आवश्यकता है। हमें समझना होगा कि हमारे अपनों ने, हमारे समाज ने हमें बहुत कुछ दिया है । इसलिए हमें इन सब के प्रति सम्मान की भावना रखनी चाहिए और उसके इस ऋण को हम अपने अच्छे कार्यों और कामयाबी का श्रेय देकर चुका सकते हैं। ऐसा न हो सफलता हासिल करने के बाद हम इन सबको अनदेखा कर दें। ऐसा करना अनुचित होगा। श्रेय देना सीखना होगा । हम ऐसा कर सकते है और इसको छोटा काम तो बिल्कुल भी ना समझे। ये कार्य हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि हमारे इसी व्यवहार से लोग हमें पहचानेंगे इसके अतिरिक्त हम कितना भी पैसा कमा ले या फिर कितना भी सफल हो जाएं। खुद के लिए तो सब करते हैं दूसरों के लिए काम करने वालों को ही सब पसंद करते हैं। लोग हमेशा अच्छाइयों को ही याद रखते हैं बुराई का तो इंतजार किया जाता है कि कब खत्म होगी या कब छूटकारा मिलेगा। संसार हमेशा श्रेष्ठ लोगों का ही अनुसरण करता है और श्रेय देना श्रेष्ठ गुणों में से एक है जिसको व्यवहार में शामिल किए जाने की आवश्यकता है। श्रेय देना सीखना होगा । हमें अंदर मौजूद इन विशेष गुणों को धारण करने की कोशिश करनी चाहिए। हमें निरंतर स्वयं से प्रश्न करने चाहिए कि क्यों हम अपनी क्षमताओं का सर्वोत्तम उपयोग करने में चूक जाते हैं?

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