हमें खुद ही अपनी पहचान बनानी होगी। (We have to make our own identity.)

यही वो शहद है जिसकी ओर सभी आकर्षित होते हैं।

यही वो शहद है जिसकी ओर सभी आकर्षित होते हैं।

हमें खुद ही अपनी पहचान बनानी होगी। दुनियां में हर कोई अपनी पहचान बनाने के लिए प्रयासरत रहता हैं। हम सब अपनी क्षमतानुसार प्रयास करते हैं। हमें खुद के बारे में, अपने काम के बारे में और अपने इतिहास के बारे में जानने की आवश्यकता है ताकि हम अपने आप को और ज्यादा बेहतर साबित कर सके। हमें खुद ही अपनी पहचान बनानी होगी। शब्दावली में सकारात्मक बदलाव करके हम अपनी आगे बढ़ने की राह को आसान कर सकते हैं। शब्दों के सही प्रयोग के अभ्यास को विकसित करने की आवश्यकता है, उन्हें सुधारनें और चमकाने की जरूरत है ताकि आधारशिला को और ज्यादा मजबूत बनाया जा सके। केवल आचरण और व्यवहार में सुधार करके भी हम अपने जीवन में बहुत महत्वपूर्ण स्थान हासिल कर सकते हैं। क्योंकी यही वो शहद है जिसकी ओर सभी आकर्षित होते हैं। ये आवश्यक नहीं ज्यादा धन दौलत और सम्पत्ति वाला इंसान एक सफल व्यक्ति हो। लेकिन ये शत प्रतिशत सही है कि एक सफल व्यक्ति के पास दौलत के साथ साथ लोगों का प्यार और सम्मान जरूर होता हैं। अपनी पहचान बनाने में हमारे शब्द और हमारा व्यवहार महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हमें खुद ही अपनी पहचान बनानी होगी।

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शिक्षा के साथ साथ संस्कार अनिवार्य रूप से आवश्यक हैं।


हमें खुद ही अपनी पहचान बनानी होगी। अपनी व्यस्तताओं में से कुछ समय निकाल कर हम अपने अंदर फिर से ख़ुश रहने की आदतों को विकसित कर सकते हैं। हमारे मन की विभिन्न अवस्थाओं के कारण ही अच्छी और बुरी परिस्थितियां उत्पन्न होती हैं। इन परिस्थितियों के लिए हम स्वयं ही जिम्मेदार होते हैं।  व्यक्ति महान शिक्षा से नहीं अपने विचारों से बनता है। ज्यादा शिक्षा हासिल करके हम कामयाब तो हो जाएंगे लेकिन मूल्यों को दांव पर लगा कर प्राप्त की गई शिक्षा हमारे लिए सोने की जंजीर से ज्यादा नहीं है। शिक्षा के साथ साथ संस्कार अनिवार्य रूप से आवश्यक हैं। केवल तभी हम अपनी पहचान बनाने में सफल हो सकेंगे। हमें खुद ही अपनी पहचान बनानी होगी। संगत का हमारे लक्ष्य प्राप्ति पर बहुत बड़ा असर पड़ता हैं। अगर हमारे साथी दोस्त समझदार, अच्छी समझ बुद्धि वाले और हमेशा अपनी क्षमताओं को विकसित करने की कोशिश करने वाले हो तो हमारे अंदर विद्यमान शक्तियां अपने आप ही विकसित होने लगती है और हम अपनी महत्वकांक्षाओं को पूरा करते हुए बुलंदियों को छू सकेंगे। अपने साथ साथ अपने साथियों को भी सफलता हासिल करने में मदद कर सकेंगे। और  अगर बुरी आदतों से ग्रस्त, समय को खुलकर बर्बाद करने वाले हमारे संगी साथी होंगे तो हम एक बेहतर समाज का निर्माण कभी नहीं कर पाएंगे। हमें खुद ही अपनी पहचान बनानी होगी।

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हमारे भाव


ज्ञान से ही भाग्य का उदय होगा


समय हाथ से निकल जा रहा है।


प्रार्थना की शक्ति


उत्साह


जिम्मेदारी

स्वस्थ सोच

अवसर


मान लिया तो हार है और ठान लिया तो जीत।


हमें खुद ही अपनी पहचान बनानी होगी। आलस्य हमारा सबसे बड़ा शत्रु है। ज्यादातर लोग आलस्य के कारण ही अपने सपनों को साकार करने में असफल हो जाते हैं। अपने खुद के महत्व को समझते हुए अच्छी आदतों को विकसित करने की आवश्यकता है। भाग्य के भरोसे नहीं बैठना है इसकी अपेक्षा खुद ही भाग्य का निर्माण करना होगा। निरंतर अपने लक्ष्य का चिंतन मनन करते हुए, खुद को मोटिवेट करते रहना चाहिए ताकि हम अपने सपनों को पूरा कर सकें। नकारात्मक ऊर्जा को न्यूनतम और सकारात्मक विचारों को अधिकतम करने की कोशिश करनी होगी। फिर भी अगर निराशा हताशा आए तो उसके साथ ही काम करते रहिए। निराश होकर बैठना समझदारी नहीं है। कहावत भी है मान लिया तो हार है और ठान लिया तो जीत। एक बड़ा कारण यह भी है कि सामान्य व्यक्ति असमंजस्य की स्थिति में रहता है और सफल व्यक्ति अपनी सफलता के बारे में सोचते और विचार करते रहते हैं। सफलता के बाद की अवस्थाओं के विषय में विचरण करते रहते हैं। एक पल के लिए भी खुद के खिलाफ बातें नहीं सोचते। हमेशा सही दिशा सफलता प्राप्त करने का प्रयास करते है और उसी दिशा में लगातार जुटे रहते हैं। अपने लक्ष्य से कभी भी नहीं भटकते। खुद को प्रेरित करने के नए नए अवसर ढूंढते रहते हैं। जोश और उत्साह से हमेशा भरपूर रहते हैं। ऐसे लोग खुद को हमेशा व्यस्त रखते है और छोटी छोटी बातों पर कभी भी निराश होकर नहीं बैठते। हमें खुद ही अपनी पहचान बनानी होगी।

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खुद की मदद कैसे करें

विचारों से ही हम खुद को और समाज को ताकतवर बना सकते हैं।


हमें खुद ही अपनी पहचान बनानी होगी। खुद को खुश और संतुष्ट रखने का सबसे बेहतरीन तरीकों में से एक है अपने विचारों, कार्यों और ऊर्जा के कुछ हिस्से को  दूसरों को खुशी देने के काम में लगा कर अपने लिए ढेर सारी खुशियां खरीद सकते हैं। इस सुखद और सुंदर जीवन को और ज्यादा बेहतर बनाने की आवश्यकता है। हमारी यही विशेषता हमें दूसरे जीवों से भिन्न करती हैं। अपनी इस विचार रूपी बहुमूल्य उपहार को सुंदर और खुशनुमा बनाने की भरकस प्रयत्न करने की आवश्यकता है। जीवन को सरल बनाने में सहायक इन विचारों से ही हम खुद को और समाज को ताकतवर बना सकते हैं। इस तरह की जीवनशैली अपनाने में अगर हमें थोड़ा समय लगाना भी पड़े तो कोई बात नहीं क्योंकि बेहतरीन और अद्भुत जीवन के लिए यह बहुत छोटी सी क़ीमत होगी। एक बात तो निश्चित है अच्छा सोचेंगे तो निश्चित रूप से अच्छा ही होगा। तो फिर परेशानी कहा है? परेशानी तब है जब हम खुद की अपेक्षा दूसरों के बारे में ज्यादा सोचते है और वो भी नकारात्मक। उसके पास ज्यादा है, ज्यादा कैसे आ गया, जरूर कुछ ग़लत किया होगा… क्या क्या विचार आते हैं। इसकी अपेक्षा उसके पास ज्यादा है तो हमें भी अपनी क्षमताओं को और ज्यादा बेहतर बना कर ज्यादा हासिल करने का प्रयास करने की आवश्यकता है। इन सब चीजों में सबसे महत्वपूर्ण धैर्य और संयम है। अपने अतिरिक्त समय में हमें अपने अंदर धैर्य और संयम को और ज्यादा विकसित करने की आवश्यकता है। वास्तव में यही हमारी सच्ची दौलत है धन तो आज़ है कल नहीं है लेकिन सच्ची दौलत हमारे गुण होते हैं जो हर परिस्थिति में हमारी सहायता करते हैं।

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